जब हनुमान जी लंका गए तब सबसे पहले विभीषण जी के यहां गए ! अगर हम भी हनुमान जी को अपने घर बुलाना चाहते हैं तो जो विभीषण जी ने किया था वह करना होगा ! क्या किया था उन्होंने ...

सुन्दरकाण्ड में बाबा तुलसी लिखते हैं कि जब हनुमान जी ने लंका में प्रवेश किया तब उन्होंने क्या देखा ..
भवन एक पुनि दीख सुहावा , हरि मंदिर तहं भिन्न बनावा ||
उन्होंने एक भवन देखा जहां भगवान का स्थान बना हुआ था और क्या था

रामायुध अंकित गृह सोभा बरनि न जाइ , नव तुलसिका बृंद तहं देखि हरष कपिराइ ||

वह भवन श्रीरामजी के आयुध के चिह्नें से अंकित था. वहां तुलसी के पौधे थे.
विभीषणजी के मकान पर मांगलिक चिह्न् बने हुए थे. हमारे निवास स्थान के द्वार पर शुभ चिह्न् होना चाहिए.

अपने नाम की नेम प्लेट लगाने से अच्छा है प्रभु नाम का लेखन करवाएं
और हनुमान जी बात किससे करते हैं पता है आपको ?
जो अपनी बात राम राम से शुरू करते है।

राम राम तेहिं सुमिरन कीन्हा। हृदयँ हरष कपि सज्जन चीन्हा॥
एहि सन सठि करिहउँ पहिचानी। साधु ते होइ न कारज हानी॥
जब विभीषण उठकर राम नाम लेते हैं तब हनुमान जी संकोच नहीं करते उनसे बात करने में
धरती पर तीन प्रकार के ताप अर्थात कष्ट हैं और उनके विनाश के लिए मानस में लिखा है कि

दैहिक दैविक भौतिक तापा। राम राज नहिं काहुहि ब्यापा

जासु नाम त्रय ताप नसावन
जिनके नाम ही तीन साल प्रकार के ताप नष्ट हो जाते हैं

श्रीमद्भागवत में भी लिखा है
तापत्रय विनशाय श्री कृष्ण: वयम नुम:
आपको पता है भगवान सदाशिव सदैव किस नाम का जाप करते हैं ?
राम नाम का
राम एक साधारण शब्द नहीं है यह एक मंत्र है जिसे तारक मंत्र कहा जाता है !
You can follow @setwickk.
Tip: mention @twtextapp on a Twitter thread with the keyword “unroll” to get a link to it.

Latest Threads Unrolled: