एक बौछार था वो शख्स,
बिना बरसे किसी अब्र की सहमी सी नमी से
जो भिगो देता था...
एक बोछार ही था वो,
जो कभी धूप की अफशां भर के
दूर तक, सुनते हुए चेहरों पे छिड़क देता था
नीम तारीक से हॉल में आंखें चमक उठती थीं
#JagjitSingh 10.10
बिना बरसे किसी अब्र की सहमी सी नमी से
जो भिगो देता था...
एक बोछार ही था वो,
जो कभी धूप की अफशां भर के
दूर तक, सुनते हुए चेहरों पे छिड़क देता था
नीम तारीक से हॉल में आंखें चमक उठती थीं
#JagjitSingh 10.10
सर हिलाता था कभी झूम के टहनी की तरह,
लगता था झोंका हवा का था कोई छेड़ गया है
गुनगुनाता था तो खुलते हुए बादल की तरह
मुस्कराहट में कई तरबों की झनकार छुपी थी
गली क़ासिम से चली एक ग़ज़ल की झनकार था वो
एक आवाज़ की बौछार था वो!! @komorebi_80
लगता था झोंका हवा का था कोई छेड़ गया है
गुनगुनाता था तो खुलते हुए बादल की तरह
मुस्कराहट में कई तरबों की झनकार छुपी थी
गली क़ासिम से चली एक ग़ज़ल की झनकार था वो
एक आवाज़ की बौछार था वो!! @komorebi_80
कब याद में तेरा साथ नहीं, कब हात में तेरा हात नहीं
सद शुक्र केः अपनी रातों में अब हिज्र की कोई रात नहीं
सद शुक्र केः अपनी रातों में अब हिज्र की कोई रात नहीं
मिट्टी द बावा
Jagjit Singh used to explain music so beautifully
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मैं जगजीत
Virasat on Rajya Sabha TV
A 5 part journey of GhazalJeet Singh https://youtu.be/6Z1Tqi-pcao ">https://youtu.be/6Z1Tqi-pc...
Virasat on Rajya Sabha TV
A 5 part journey of GhazalJeet Singh https://youtu.be/6Z1Tqi-pcao ">https://youtu.be/6Z1Tqi-pc...
Jagjit Singh touching lives through his wonderful ghazals
1964 -till eternity .
64& #39; , coz he used to sing for AIR jalandhar in those days .( Correct, if I am wrong )
1964 -till eternity .
64& #39; , coz he used to sing for AIR jalandhar in those days .( Correct, if I am wrong )
Kaagaz ki kashti
Thanks to @brahmanandsingh
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Jagjit Singh and Ghalib
Jagjit Singh ~ Rockstar
He was very funny in his stage performances , here taking a dig on Baba Ramdev
Chitra Ji& #39;s first impression of JS
तौबा ये कोई आवाज़ है
तौबा ये कोई आवाज़ है
Jagjit Singh , a real artist
More on Kaagaz ki kashti by @brahmanandsingh
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Modest Jagjit