संजय सिंह जी और अन्य सांसद रात भर संसद परिसर में देश के किसानों के लिए संघर्ष करते रहे। मच्छर, गर्मी और अन्य असुविधाओं की परवाह किए बग़ैर किसानों के लिए लड़ते रहे। वे अपने लिए कुछ नहीं माँग रहे। वो जनतंत्र और संविधान के लिए लड़ रहे हैं। वे देश के किसानों के लिए संघर्षरत हैं।
देशभर के किसान कह रहे हैं कि ये क़ानून किसानों को खतम कर देंगे। इतने ख़तरनाक क़ानूनों को बिना वोटिंग करवाए संसद से पास घोषित कर दिया? फिर संसद का क्या मतलब, चुनावों का क्या मतलब?अगर इसी तरह क़ानून पास करवाने हैं तो संसद सत्र क्यों बुलाते हो?