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"पवन तनय संकट हरण, मंगल मूरत रूप
राम लखन सीता सहित, ह्रदय बसहु सुर भूप"
तनय = पुत्र
भूप= राजा/ श्रेष्ठ
शब्दार्थ :
हे संकट मोचन पवन कुमार! आप आनंद मंगलों के स्वरूप हैं। हे देवताओं में श्रेष्ठ आप श्री राम, सीता जी और लक्ष्मण सहित मेरे हृदय में निवास कीजिए।
(1/7) https://twitter.com/iankushpandey/status/1297596287060029441
"पवन तनय संकट हरण, मंगल मूरत रूप
राम लखन सीता सहित, ह्रदय बसहु सुर भूप"
तनय = पुत्र
भूप= राजा/ श्रेष्ठ
शब्दार्थ :
हे संकट मोचन पवन कुमार! आप आनंद मंगलों के स्वरूप हैं। हे देवताओं में श्रेष्ठ आप श्री राम, सीता जी और लक्ष्मण सहित मेरे हृदय में निवास कीजिए।
(1/7) https://twitter.com/iankushpandey/status/1297596287060029441
एक भाव :
हनुमान चालीसा में वंदना के दौरान सिर्फ महावीर या हनुमान के नाम से सम्बोधित किया गया है लेकिन अंतिम दोहे में फिर से याद दिलाया कि आप पवन तनय हैं। जामवंत ने भी तो इसी नाम से शक्ति याद दिलाई थी
"पवन तनय बल पवन समाना"।
तो जी कैसा बल होता पवन क, वो ऐसा होता कि
(2/7)
हनुमान चालीसा में वंदना के दौरान सिर्फ महावीर या हनुमान के नाम से सम्बोधित किया गया है लेकिन अंतिम दोहे में फिर से याद दिलाया कि आप पवन तनय हैं। जामवंत ने भी तो इसी नाम से शक्ति याद दिलाई थी
"पवन तनय बल पवन समाना"।
तो जी कैसा बल होता पवन क, वो ऐसा होता कि
(2/7)
पृथ्वी के हर कोने में सब कुछ उड़ाने में सक्षम तेज़ हवाएं जा सकतीं। भक्त याद दिलाता कि आप ऐसी कोई जगह नहीं जहाँ सहयता नहीं कर सकते। जिस तरह पवन अपने रास्ते में आने वाले हर अवरोध को उड़ा ले जाती वैसे ही आप भी मेरे सरे संकटों का ऐसे ही हरण कर लीजिये।
(3/7)
(3/7)
लेकिन एक बार देव रौद्र रूप में आ जाएँ तो रोकना भारी पड़ जाता भगवन नरसिंह को भक्त प्रह्लाद ने रोका था माँ महाकाली को महादेव ने रोका था इसी तरह भक्त फिर कहता एक बार संकट का हरण हो जाए तो रौद्र रूप छोड़ कर मंगल रूप में आ जाइये जिसे प्राणवायु के नाम से जानते। पांच तत्वों से बने
(4/7)
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इस शरीर में अगर प्राणवायु रहेगी तो जीवन रहेगा चाहे और तत्व कम ज़्यादा हो जाएँ लेकिन वायु गयी, श्वास रुपी वायु नहीं रही तो मृत्यु तुरंत हो जाती। भक्त मांगता कि आप भी मेरे जीवन के अंत तक मेरे साथ हो जाइये और ह्रदय में आ जाइये।
अब भक्त अपने भगवान् से मांग रहा तो कम कम क्यों
(5/7)
अब भक्त अपने भगवान् से मांग रहा तो कम कम क्यों
(5/7)
मांगे दाता के दरबार में मांगने शर्म क्यों| तो पीछे से कह दिया अच्छा जब आ ही रहे हैं तो अकेले मत आइयेगा श्री राम माता जानकी और श्री लक्ष्मण जी को भी साथ लाइयेगा और मेरे ह्रदय में हमेशा के लिए बस जाइये।
पवन तनय संकट हरण, मंगल मूरत रूप
राम लखन सीता सहित, ह्रदय बसहु सुर भूप
(6/7)
पवन तनय संकट हरण, मंगल मूरत रूप
राम लखन सीता सहित, ह्रदय बसहु सुर भूप
(6/7)
अगली चर्चा श्री राम जी और हनुमान जी के आ जाने से जीवन में आने वाले प्रभाव के बारे में करेंगे |
तब तक के लिए
जय राम जी की


end
(7/7)
तब तक के लिए
जय राम जी की



end
(7/7)