जेल में मुसलमानों के साथ वहशियाना सुलूक
:-अयोध्या हमले के इल्ज़ाम में नैनी सेंट्रल जेल में कैद सहारनपुर के डा० इरफ़ान ने राष्ट्रपति के नाम ख़त लिखा। इस ख़त मेंउन्होंने अपने ऊपर पुलिस के ज़रिया ढाए जाने वाले ज़ुल्म की जो दास्तान लिखी है वह अबुगरीब और गुअतनामो के ज़ुल्म को फीका कर
:-अयोध्या हमले के इल्ज़ाम में नैनी सेंट्रल जेल में कैद सहारनपुर के डा० इरफ़ान ने राष्ट्रपति के नाम ख़त लिखा। इस ख़त मेंउन्होंने अपने ऊपर पुलिस के ज़रिया ढाए जाने वाले ज़ुल्म की जो दास्तान लिखी है वह अबुगरीब और गुअतनामो के ज़ुल्म को फीका कर
देने वाली है। जिससे S.T.F. की मानसिकता का आसानी से अंदाज़ा हो जाता है।याद रहे कि डा०इरफ़ान अभी भी मुल्ज़िम हैं लेकिन एक मुल्ज़िम को पहले रोज़ से गिरफ़्तार करने के बाद उसके साथ जैसा सुलूक किया जा रहा है वह पूरी कौम के लिए एक सोचने और फ़िक्र करने की बात है। डा० इरफ़ान लिखते हैं-"
"कोई त्यागी नाम का पुलिस वाला था जिसने गिरफ्तारी के फ़ौरन बाद ही (लॉकअप में लाने के बाद) मेरे मुंह पर थूकना शुरू कर दिया,नंगा करके...... बाल उखाड़ा गया,वह मुझे उल्टा लटका कर नाक में पानी डालते थे,मोमबत्ती को तिरछा करके पिघला हुआ मोम मेरे गुप्तांगो पर गिराते थे। मैं चीखता था,
तड़पता था,वह लोग कहकहे लगातेथे...वह मेरे मुंह पर पेशाब करते थे और उसको पीने के लिए मजबूर करते थे अगर थूक दूँ तो मुझे बुरी तरह पीटते थे,.... त्यागी कहता था कि देख S.T.F. के कमांडो क्या करते हैं, और अभी आगे देखता जा...त्यागी लम्बा हाथ,मुंह पर चेचक के दाग थे,बाकी जो 4-5 पहलवान टाइप
के लड़के थे वह एक्सरसाइज करके सुबह हनुमान चालीसा और दुर्गा चालीसा पढ़ते थे,उनके पास राइफल थी..दिन भर हज़ार बार मुझे माँ बहन की गाली दी जाती थी,मेरे गंजे सिर पर चप्पलो से पीटा जाता, 25 चप्पल गिन कर मारते फिर गिनती भूल जाने का बहाना करके फिर मारते।सहारनपुर से जीप के द्वारा
फैज़ाबाद के लिए चले,रास्ते में दो राते थाने पर गुज़ारी,दोनों थानों में मुझे रात भर नंगा करके रखा गया। स्थानीय पुलिस वाले मेरे पास सिर्फ थूकने के लिए आते थे,क्या सिपाही क्या दरोगा,क्या पुलिस ऑफिसर..फिर मुझे फैज़ाबाद अदालत में पेश किया गया,जहां मीडिया वालो ने वकीलों के साथ मिल कर
मेरी ज़बरदस्त पिटाई की। फैज़ाबाद जेल पंहुचा वहाँ कैद तन्हाई में डाल दिया गया। छोटी सी कोठरी..अन्दर ही टॉयलेट,एक घड़ा पानी,बदबू से दम घुटता था। सांस लेना मुश्किल,उसी में खाना, वकीलों ने केस लड़ने से इनकार कर दिया। जो भी वकील मेरे घर वाले भेजते थे उन्हें फैजाबाद के वकील जज के
सामने ही कोर्ट रूम में दौड़ा दौड़ा कर पीटते थे।रोज़नामा राष्ट्रीय सहारा उर्दू 5 जुलाई 2013)भाइयो प्लीज हर कोई इसे शेयर ज़रूर कर