Very Long Thread exposing the real intentions and meaning of Azaan and how every maulvi in India is liable for Criminal Charges every time he recites a Azaan...
For safety it will be in Hindi
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1. भारत धर्मनिरपेक्ष देश है| इसमें सारे धर्म के लोगों को अन्य धर्मियों की भावनाओं को आहत किये बिना जिम्मेदारी से रहना जरुरी है| अजान का अर्थ इस लेख में दिया है और इस लेख में यह भी सप्रमाण दिखाया गया है की अजान आईपीसी की धाराए १५३, १५३ अ, २९५ अ का उल्लंघन करती है
2.इसलिए उसमे से विशिष्ट शब्द हटाने चाहिए और माननीय सर्वोच्च न्यायालय को व्यापक जनहित का ध्यान रखते हुए इसका सुओ मोटो संज्ञान लेना जरुरी हो गया है|
3. अगर मुस्लिम समुदाय स्वयं ही संज्ञान लेकर अजान से विवादित शब्द हटा देते है अथवा अजान के लिए लाऊडस्पीकर का उपयोग बंद कर देते है तो देश में सद्भावना बढ़ेगी| देशहित के लिए चिकित्सक तर्कपूर्ण वैज्ञानिक दृष्टिकोण रखना हर भारतीय का संवैधानिक मुलभुत कर्त्तव्य है|
4. यह लेख उस कर्त्तव्य का पालन करते हुए अजान की वजह से देश में बार बार जो धार्मिक तनाव बनते है उसपर स्थायी हल निकालने के लिए लिखा गया है|
5. भाग १: पहले हम ‘अज़ान (उर्दू: أَذَان)’ या ‘अदान’ के सारे हिस्सों का मतलब जान लेंगे*
*[१.१] अजान क्या है?*
इस्लाम में मुस्लिम समुदाय अपने दिन भर की पांचों नमाज़ों के लिए बुलाने के लिए ऊँचे स्वर में जो शब्द कहते हैं, उसे अज़ान कहते हैं।
*[१.१] अजान क्या है?*
इस्लाम में मुस्लिम समुदाय अपने दिन भर की पांचों नमाज़ों के लिए बुलाने के लिए ऊँचे स्वर में जो शब्द कहते हैं, उसे अज़ान कहते हैं।
6. १.२] अजान का अर्थ*
*[१.२.१] सर्वप्रथम मुअज्जिन ४ बार ‘_अल्लाह हू अकबर_’ यानी ‘_अल्लाह सबसे महान/बड़ा है_’, कहता है। इन शब्दों पर गैर मुस्लिमों को कानूनन आपत्ति है|*
*[१.२.१] सर्वप्रथम मुअज्जिन ४ बार ‘_अल्लाह हू अकबर_’ यानी ‘_अल्लाह सबसे महान/बड़ा है_’, कहता है। इन शब्दों पर गैर मुस्लिमों को कानूनन आपत्ति है|*
7. *[१.२.२] इसके बाद वह २ बार कहता है- ‘_अश-हदू अल्ला-इलाहा इल्लल्लाह_’ अर्थात ‘मैं गवाही देता हूँ कि अल्लाह के सिवाय कोई पूजनीय (इबादत के काबिल) नहीं है’। इन शब्दों पर गैर मुस्लिमों को कानूनन आपत्ति है|*
8. *[१.२.३] फिर वह २ बार कहता है- ‘_अशहदु अन-ना मुहम्मदर्रसूलुल्लाह_’ जिसका अर्थ है- ‘_मैं गवाही देता हूँ कि हजरत मुहम्मद अल्लाह के रसूल (उपदेशक) हैं_’।*
*[१.२.४] फिर मुअज्जिन दाहिनी ओर मुँह करके २ बार कहता है --- ‘_ह़य्य 'अलस्सलाह_’ अर्थात् ‘_आओ नमाज (इबादत) की ओर_’।*
*[१.२.४] फिर मुअज्जिन दाहिनी ओर मुँह करके २ बार कहता है --- ‘_ह़य्य 'अलस्सलाह_’ अर्थात् ‘_आओ नमाज (इबादत) की ओर_’।*
9. *[१.२.५] फिर बाईं ओर मुँह करके २ बार कहता है- ‘_ह़य्य 'अलल्फलाह_’ यानी ‘_आओ कामयाबी की ओर_’।*
*[१.२.६] ## सिर्फ फजर यानी भोर की अजान में मुअज्जिन यह वाक्य कहता है ---- ‘_अस्सलातु खैरूं मिनन नउम_’ अर्थात ‘_नमाज नींद से बेहतर है_’।*
*[१.२.६] ## सिर्फ फजर यानी भोर की अजान में मुअज्जिन यह वाक्य कहता है ---- ‘_अस्सलातु खैरूं मिनन नउम_’ अर्थात ‘_नमाज नींद से बेहतर है_’।*
10. *[१.२.७] इसके बाद वह सामने (पश्चिम) की ओर मुँह करके कहता है- ‘_अल्लाह हू अकबर_’ अर्थात ‘_अल्लाह ही सबसे बड़ा/महान है_’। इन शब्दों पर गैर मुस्लिमों को कानूनन आपत्ति है|
11.*भाग २: अजान में ‘## अल्लाह हो अकबर ##’ कहने से गैर मुस्लिम धर्मियों के धार्मिक भावना को ठेस पहुचती है और आइपीसी की धारा १५३, १५३ अ, २९५ अ के तहत मुक़दमा हो सकता है, जो की भारत के सहिष्णु गैर मुस्लिम नागरिकों ने अब तक तो नहीं किया है|*
*आपत्ति क्रमांक १ (भाग २ पर आधारित)
*आपत्ति क्रमांक १ (भाग २ पर आधारित)
12. आपत्ति १ – मुद्दा १
आप अपने प्रार्थनास्थल में अपने खुदा की इबादत/पूजा जरूर करे, उसके गुण गाए इसमें किसी को कोई परेशानी नहीं है| संविधान यह अधिकार हर नागरिक को देता है| पर भारत जैसे धर्मनिरपेक्ष देश में क्या इस तरह से लाउडस्पीकर पर ऊँची आवाज में ‘*अल्लाह ही सबसे बड़ा/महान है
आप अपने प्रार्थनास्थल में अपने खुदा की इबादत/पूजा जरूर करे, उसके गुण गाए इसमें किसी को कोई परेशानी नहीं है| संविधान यह अधिकार हर नागरिक को देता है| पर भारत जैसे धर्मनिरपेक्ष देश में क्या इस तरह से लाउडस्पीकर पर ऊँची आवाज में ‘*अल्लाह ही सबसे बड़ा/महान है
13. ऐसा खुले आम कहकर दूसरे धर्मों के मानने वालों की भावनाओं को ठेस पहुंचायी जा सकती है? एक सेकुलर देश में क्या कोई यह कैसे कह सकता है कि अल्लाह ही सबसे बड़ा/महान है?
[आपत्ति १ – मुद्दा २]*

*सनातन घर्म तो नहीं मानता कि----*
*अल्लाह ही सबसे बड़ा है*
*अल्लाह ही पूजनीय है
[आपत्ति १ – मुद्दा २]*

*सनातन घर्म तो नहीं मानता कि----*
*अल्लाह ही सबसे बड़ा है*
*अल्लाह ही पूजनीय है
14. *मोहम्मद अल्लाह का रसूल है*
इन सब बातों से किसी हिन्दू सनातनी या गैरमुस्लिम को क्या

, संविधान हर नागरिक को अपने धार्मिक विश्वास पर चलने के स्वतंत्रता देता है (लेकिन औरों के धार्मिक विश्वास को ठेस लगाये बिना)*
इन सब बातों से किसी हिन्दू सनातनी या गैरमुस्लिम को क्या




15. *[आपत्ति १ – मुद्दा ३]*
_देखा जाये तो बौद्धों के लिए बुद्ध और आंबेडकर जी महान है, ईसाईयों के लिए जीजस और येवोहा महान है, सिखों के लिए सारे गुरु और गुरु ग्रंथसाहिब महान है, हिन्दुओं के लिए भगवान् के अलग अलग रूप महान है, जैनों के लिए उनके २४ तीर्थंकर महान है|
_देखा जाये तो बौद्धों के लिए बुद्ध और आंबेडकर जी महान है, ईसाईयों के लिए जीजस और येवोहा महान है, सिखों के लिए सारे गुरु और गुरु ग्रंथसाहिब महान है, हिन्दुओं के लिए भगवान् के अलग अलग रूप महान है, जैनों के लिए उनके २४ तीर्थंकर महान है|
16. मतलब यह की हर धर्म में कोई न कोई महान है| तो केवल अल्लाह ही महान है यह कहना सभी गैर मुस्लिमों की भावनाए आहत करता है_
17.
*[आपत्ति १ – मुद्दा ४]*
_संविधान यह कहता है की आप अपने धर्म का पालन जरुर करे पर अन्य धर्मियों के धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुचाये बिना यह काम करो| धर्म तो निजी श्रद्धा की बात है और उसका निर्वाह संयमित तरीके से होना चाहिए|
*[आपत्ति १ – मुद्दा ४]*
_संविधान यह कहता है की आप अपने धर्म का पालन जरुर करे पर अन्य धर्मियों के धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुचाये बिना यह काम करो| धर्म तो निजी श्रद्धा की बात है और उसका निर्वाह संयमित तरीके से होना चाहिए|
18. लेकिन हर एक दिन पांच बार होनेवाली नमाज से पहले खुलेआम जोर से आवाज देकर ‘*अल्लाह सबसे बड़ा/महान है*’ यह कहकर अन्य सारे धर्मियों की भावना को ठेस लगायी जाती है| ऐसा खुलेआम कहने से गैरमुस्लिम धर्मों के लोगों के देवता और महापुरुषों का अपमान भी होता है|_
19.आपत्ति १ – मुद्दा ५
अगर मुस्लिम ‘*अल्लाह सबसे बड़ा/महान है*’ यह बात अपने घर में या प्रार्थनास्थल में या इनके धार्मिक सत्संग में कहेंगे तो ठीक है; पर उनके द्वारा खुलेआम चिल्लाकर ऐसी बात कहना संविधान के विरुद्ध तो है ही, साथ में वह आईपीसी धारा १५३, १५३ अ और २९५ अ उल्लंघन है|
अगर मुस्लिम ‘*अल्लाह सबसे बड़ा/महान है*’ यह बात अपने घर में या प्रार्थनास्थल में या इनके धार्मिक सत्संग में कहेंगे तो ठीक है; पर उनके द्वारा खुलेआम चिल्लाकर ऐसी बात कहना संविधान के विरुद्ध तो है ही, साथ में वह आईपीसी धारा १५३, १५३ अ और २९५ अ उल्लंघन है|
20. *[आपत्ति १ – मुद्दा ६]*
_इस बात पर अब तक किसीने आपत्ति नहीं की इसका मतलब यह बिलकुल नहीं की अजान क़ानूनी तौर पर जायज है| इसपर कोर्ट में याचिका बन सकती है और अजान से यह शब्द हटाने की मांग की जा सकती है या फिर अजान लाउडस्पीकर पर ना देनेका आदेश हो सकता है|_
_इस बात पर अब तक किसीने आपत्ति नहीं की इसका मतलब यह बिलकुल नहीं की अजान क़ानूनी तौर पर जायज है| इसपर कोर्ट में याचिका बन सकती है और अजान से यह शब्द हटाने की मांग की जा सकती है या फिर अजान लाउडस्पीकर पर ना देनेका आदेश हो सकता है|_
21. [आपत्ति १ – मुद्दा ७]*
_जब लाऊडस्पीकर नहीं थे तब भी अजान कम आवाज में होती थी यह बात समझकर और अन्य धर्मियों की भावनाओं का आदर करते हुए मुस्लिम समुदाय को स्वयम ही लाऊडस्पीकर हटाने चाहिए या फिर अजान से ‘*अल्लाह हू अकबर*’ शब्द हटाने चाहिए|
_जब लाऊडस्पीकर नहीं थे तब भी अजान कम आवाज में होती थी यह बात समझकर और अन्य धर्मियों की भावनाओं का आदर करते हुए मुस्लिम समुदाय को स्वयम ही लाऊडस्पीकर हटाने चाहिए या फिर अजान से ‘*अल्लाह हू अकबर*’ शब्द हटाने चाहिए|
22. भाग ४: अजान में ‘_अशहदु अन-ना मुहम्मदर्रसूलुल्लाह_’, ‘_ह़य्य 'अलस्सलाह_’, ‘_ह़य्य 'अलल्फलाह_’, और ‘_अस्सलातु खैरूं मिनन नउम_’ इन शब्दों का होना यह इस्लाम का आतंरिक मामला (internal matter) है और इसपर किसी गैर मुस्लिम को कोई आपत्ति नहीं है|*
23. भाग ५: अजान में ‘_ला इलाह इल्लल्लाह_’ अर्थात् ‘_अल्लाह के सिवा कोई भी पूजनीय (इबादत के काबिल) नहीं है_’ कहने से गैर मुस्लिम धर्मियों के धार्मिक भावना को ठेस पहुचती है और आइपीसी की धारा १५३, १५३ अ, २९५ अ के तहत मुक़दमा हो सकता है,
24. आपत्ति क्रमांक ४ (भाग ५ पर आधारित):*
*[आपत्ति ४ – मुद्दा १]*
_अजान मुस्लिमों के लिए होती है और हर मुस्लिम ‘*ला इलाह इल्लल्लाह यानि अल्लाह के सिवाय कोई पूजनीय (इबादत के काबिल) नहीं*’ यह बात (उनका धार्मिक विश्वास/सच) पहले से ही जानता है|
*[आपत्ति ४ – मुद्दा १]*
_अजान मुस्लिमों के लिए होती है और हर मुस्लिम ‘*ला इलाह इल्लल्लाह यानि अल्लाह के सिवाय कोई पूजनीय (इबादत के काबिल) नहीं*’ यह बात (उनका धार्मिक विश्वास/सच) पहले से ही जानता है|
25. तो क्या ऐसा रोज पांच बार मुस्लिमों साथ अन्य धर्मियों को भी ऊँची आवाज में इस बात को सुनाने की यह कृति (हरकत) जानबुझकर गैर मुस्लिमों को उकसाने जैसा (willful provocation) नहीं है?
26. कोर्ट को इसका संज्ञान सुओ मोटो (suo moto) लेना ही होगा और हर दिन पाच बार गैरमुस्लिमों की भावनाओं को आहत करना रोकना होगा|_
27. *[आपत्ति ४ – मुद्दा २]*
_ऊँची आवाज में दी जानेवाली अजान में ‘*ला इलाह इल्लल्लाह*’ इन शब्दों का होना संविधान के विरुद्ध तो है ही, साथ में वह आईपीसी धारा १५३, १५३ अ और २९५ अ का खुलेआम उल्लंघन है|_
_ऊँची आवाज में दी जानेवाली अजान में ‘*ला इलाह इल्लल्लाह*’ इन शब्दों का होना संविधान के विरुद्ध तो है ही, साथ में वह आईपीसी धारा १५३, १५३ अ और २९५ अ का खुलेआम उल्लंघन है|_
28. [आपत्ति ४ – मुद्दा ३]*
_इस बात पर अब तक किसीने आपत्ति नहीं की इसका मतलब यह बिलकुल नहीं की अजान क़ानूनी तौर पर जायज है| इसपर कोर्ट में याचिका बन सकती है और अजान से यह शब्द हटाने की मांग की जा सकती है| या फिर अजान लाउडस्पीकर पर ना देनेका आदेश हो सकता है|_
_इस बात पर अब तक किसीने आपत्ति नहीं की इसका मतलब यह बिलकुल नहीं की अजान क़ानूनी तौर पर जायज है| इसपर कोर्ट में याचिका बन सकती है और अजान से यह शब्द हटाने की मांग की जा सकती है| या फिर अजान लाउडस्पीकर पर ना देनेका आदेश हो सकता है|_
29. *[आपत्ति ४ – मुद्दा ४]*
_जब लाऊडस्पीकर नहीं थे तब भी अजान कम आवाज में होती थी यह बात समझकर और अन्य धर्मियों की भावनाओं का आदर करते हुए मुस्लिम समुदाय को स्वयम ही लाऊडस्पीकर हटाने चाहिए या फिर अजान से ‘*ला इलाह इल्लल्लाह*’ शब्द हटाने चाहिए|
_जब लाऊडस्पीकर नहीं थे तब भी अजान कम आवाज में होती थी यह बात समझकर और अन्य धर्मियों की भावनाओं का आदर करते हुए मुस्लिम समुदाय को स्वयम ही लाऊडस्पीकर हटाने चाहिए या फिर अजान से ‘*ला इलाह इल्लल्लाह*’ शब्द हटाने चाहिए|
30.हर गैर मुस्लिम अब अच्छे और सच्चे मुस्लिम से यह उम्मीद रखता है और इसपर मुस्लिम स्वयं ही पहल करे तो देश के हित में बड़ी बात होगी|_
31. *भाग ४:
अजान में ‘_अशहदु अन-ना मुहम्मदर्रसूलुल्लाह_’, ‘_ह़य्य 'अलस्सलाह_’, ‘_ह़य्य 'अलल्फलाह_’, और ‘_अस्सलातु खैरूं मिनन नउम_’ इन शब्दों का होना यह इस्लाम का आतंरिक मामला (internal matter) है और इसपर किसी गैर मुस्लिम को कोई आपत्ति नहीं है|*
अजान में ‘_अशहदु अन-ना मुहम्मदर्रसूलुल्लाह_’, ‘_ह़य्य 'अलस्सलाह_’, ‘_ह़य्य 'अलल्फलाह_’, और ‘_अस्सलातु खैरूं मिनन नउम_’ इन शब्दों का होना यह इस्लाम का आतंरिक मामला (internal matter) है और इसपर किसी गैर मुस्लिम को कोई आपत्ति नहीं है|*
32. *आपत्ति क्रमांक ४ (भाग ५ पर आधारित):*
*[आपत्ति ४ – मुद्दा १]*
_अजान मुस्लिमों के लिए होती है और हर मुस्लिम ‘*ला इलाह इल्लल्लाह यानि अल्लाह के सिवाय कोई पूजनीय (इबादत के काबिल) नहीं*’ यह बात (उनका धार्मिक विश्वास/सच) पहले से ही जानता है|
*[आपत्ति ४ – मुद्दा १]*
_अजान मुस्लिमों के लिए होती है और हर मुस्लिम ‘*ला इलाह इल्लल्लाह यानि अल्लाह के सिवाय कोई पूजनीय (इबादत के काबिल) नहीं*’ यह बात (उनका धार्मिक विश्वास/सच) पहले से ही जानता है|
33. तो क्या ऐसा रोज पांच बार मुस्लिमों साथ अन्य धर्मियों को भी ऊँची आवाज में इस बात को सुनाने की यह कृति (हरकत) जानबुझकर गैर मुस्लिमों को उकसाने जैसा (willful provocation) नहीं है?
34. कोर्ट को इसका संज्ञान सुओ मोटो (suo moto) लेना ही होगा और हर दिन पाच बार गैरमुस्लिमों की भावनाओं को आहत करना रोकना होगा|_
35. *[आपत्ति ४ – मुद्दा २]*
_ऊँची आवाज में दी जानेवाली अजान में ‘*ला इलाह इल्लल्लाह*’ इन शब्दों का होना संविधान के विरुद्ध तो है ही, साथ में वह आईपीसी धारा १५३, १५३ अ और २९५ अ का खुलेआम उल्लंघन है|_
_ऊँची आवाज में दी जानेवाली अजान में ‘*ला इलाह इल्लल्लाह*’ इन शब्दों का होना संविधान के विरुद्ध तो है ही, साथ में वह आईपीसी धारा १५३, १५३ अ और २९५ अ का खुलेआम उल्लंघन है|_
36. *[आपत्ति ५ – मुद्दा ४]*
_इस बात पर अब तक किसीने आपत्ति नहीं की इसका मतलब यह बिलकुल नहीं की अजान क़ानूनी तौर पर जायज है| इसपर कोर्ट में याचिका बन सकती है और अजान से यह शब्द हटाने की मांग की जा सकती है| या फिर अजान लाउडस्पीकर पर ना देनेका आदेश हो सकता है|_
_इस बात पर अब तक किसीने आपत्ति नहीं की इसका मतलब यह बिलकुल नहीं की अजान क़ानूनी तौर पर जायज है| इसपर कोर्ट में याचिका बन सकती है और अजान से यह शब्द हटाने की मांग की जा सकती है| या फिर अजान लाउडस्पीकर पर ना देनेका आदेश हो सकता है|_
37. *[आपत्ति ५ – मुद्दा ५]*
_जब लाऊडस्पीकर नहीं थे तब भी अजान कम आवाज में होती थी यह बात समझकर और अन्य धर्मियों की भावनाओं का आदर करते हुए मुस्लिम समुदाय को स्वयम ही लाऊडस्पीकर हटाने चाहिए या फिर अजान से ‘*ला इलाह इल्लल्लाह*’ शब्द हटाने चाहिए|
_जब लाऊडस्पीकर नहीं थे तब भी अजान कम आवाज में होती थी यह बात समझकर और अन्य धर्मियों की भावनाओं का आदर करते हुए मुस्लिम समुदाय को स्वयम ही लाऊडस्पीकर हटाने चाहिए या फिर अजान से ‘*ला इलाह इल्लल्लाह*’ शब्द हटाने चाहिए|
38. हर गैर मुस्लिम अब अच्छे और सच्चे मुस्लिम से यह उम्मीद रखता है और इसपर मुस्लिम स्वयं ही पहल करे तो देश के हित में बड़ी बात होगी|_
39. This entire analysis was sent to me by a 50 year old First Year Law Student, For his safety I decided not to disclose his identity.
The Crux is next time you hear Azaan, Just go to the Police Station and register FIR under sections 153/153A/295A of IPC. I would do it.
The Crux is next time you hear Azaan, Just go to the Police Station and register FIR under sections 153/153A/295A of IPC. I would do it.