Be it in waking state (जागृत अवस्था) or dream state ( स्वप्न अवस्था) the mechanism of cognizer cognizing objects, thus the model of reality as we perceive, is described in Upanishads as follows:
1/ https://twitter.com/Tan_Tripathi/status/1247045729702428672?s=20
1/ https://twitter.com/Tan_Tripathi/status/1247045729702428672?s=20
इन्द्रियेभ्यः परा ह्यर्था अर्थेभ्यश्च परं मनः ।
मनसस्तु परा बुद्धिर्बुद्धेरात्मा महान्परः ॥ १०॥
महतः परमव्यक्तमव्यक्तात्पुरुषः परः ।
पुरुषान्न परं किंचित्सा काष्ठा सा परा गतिः ॥ ११॥
2/
https://sanskritdocuments.org/doc_upanishhat/katha.html?lang=sa
मनसस्तु परा बुद्धिर्बुद्धेरात्मा महान्परः ॥ १०॥
महतः परमव्यक्तमव्यक्तात्पुरुषः परः ।
पुरुषान्न परं किंचित्सा काष्ठा सा परा गतिः ॥ ११॥
2/
https://sanskritdocuments.org/doc_upanishhat/katha.html?lang=sa
Goswami Tulsidas simplifies abv and describes in his RCM as follows:
बिषय करन सुर जीव समेता। सकल एक तें एक सचेता॥
सब कर परम प्रकासक जोई। राम अनादि अवधपति सोई॥3॥
3/
https://hindi.webdunia.com/religion/religion/hindu/ramcharitmanas/BalKand/27.htm
बिषय करन सुर जीव समेता। सकल एक तें एक सचेता॥
सब कर परम प्रकासक जोई। राम अनादि अवधपति सोई॥3॥
3/
https://hindi.webdunia.com/religion/religion/hindu/ramcharitmanas/BalKand/27.htm
भावार्थ:-विषय, इन्द्रियाँ, इन्द्रियों के देवता और जीवात्मा- ये सब एक की सहायता से एक चेतन होते हैं। (अर्थात विषयों का प्रकाश इन्द्रियों से, इन्द्रियों का इन्द्रियों के देवताओं से और इन्द्रिय देवताओं का चेतन जीवात्मा से प्रकाश होता है।)
4/
4/
इन सबका जो परम प्रकाशक है (अर्थात जिससे इन सबका प्रकाश होता है), वही अनादि ब्रह्म अयोध्या नरेश श्री रामचन्द्रजी हैं॥
5/
Bhagwan Raman Maharshi described it in even simpler form through his famous Cinema Analogy.
http://acfip.org/analogy.html
5/
Bhagwan Raman Maharshi described it in even simpler form through his famous Cinema Analogy.
http://acfip.org/analogy.html
So looking at abv Cinema model, scene as perceived by seer has its source in #3 ie film or latent tendencies (पुर्वकृत कर्मों का संस्कार या वासनायें जो कि सात्विक, राजसिक या तामसिक हो सकती हैं।)
6/
6/
There are two possibilities.
1) If the latent tendency is from this life then probably you have read too much of Isaac Asimov.
2) If from past life then Space is most subtle of panchabhutas hence represents strong Satva.
7/
@Tan_Tripathi
1) If the latent tendency is from this life then probably you have read too much of Isaac Asimov.

2) If from past life then Space is most subtle of panchabhutas hence represents strong Satva.
7/
@Tan_Tripathi
तो कोई सात्विक संस्कार( मन से संबंधित) चित्त में दबा हुआ है। और उसमें द्रव्यपिंड दिखते हैं मतलब तमस की भी छाप है उसपर। अगर तमस की छाप न होती तो देवता इत्यादि को दिखना चाहिये। स्वप्न बार-२ आता है मतलब संस्कार गहरा है।
Abhi to Itna hee bata sakte hain.
8/8
@Tan_Tripathi
Abhi to Itna hee bata sakte hain.
8/8
@Tan_Tripathi
Looking at your header photo I would guess you must have been Buddhist or Jain in your past life and did some Saadhna. :)
Please delete it. ye sab baat publicaly nahin bolte. :)