रावण वध के पश्चात भगवान राम को ब्राह्मण हत्या( ब्रम्हदोष )का पाप लगा था उनके गुरु वशिष्ट ने भगवान को इस पाप से मुक्ति के लिए काशी की परिक्रमा करने का सुझाव दिया जिसको पंचकोशी परिक्रमा कहते है ।इसी परिक्रमा का तीसरा पड़ाव है रामेश्वर महादेव जो स्वयं भगवान राम द्वारा स्थापित है ।
गुरु वशिष्ट ने भगवान राम को यह भी बताया कि अगर वह भगवान शिव की स्थापना कर देंगे तोह वह पाप से मुक्त हो जाएंगे तोह भगवान राम ने हनुमान जी को किष्किंधा से शिवलिंग लाने का आदेश दिया किन्तु हनुमान जी को किष्किंधा से शिवलिंग लाने में विलम्ब हो गया।
जिसके पश्चात गुरु वशिष्ट के कहने पर भगवान राम ने वरुणा नदी के किनारे से एक मुट्ठी रेत ले कर एक शिवलिंग की स्थापना की और रामेश्वर नाम दिया रामेश्वर अर्थात राम के ईश्वर लेकिन भगवान शिव ने अलग प्रकार से इस नाम का वर्णन किया शिव जी के अनुसार रामेश्वर अर्थात राम जिसके ईश्वर हो
फिर जब हनुमान जी किष्किंधा से शिवलिंग ले कर आये तो उन्होंने प्रभु से पूछा कि अब इस शिवलिंग का क्या करना है तोह भगवान राम ने उस शिवलिंग की भी वरुणा नदी के दूसरे छोर पर स्थापना की जिसको असंख्यात शिवलिंगेश्वर के नाम से जाना जाता है ।